
पॉश’ इलाके की बदहाल तस्वीर: एक पत्थर नहीं लगवा पा रही नगर पालिका! 5. विकास के दावों के बीच ‘गड्ढे’ में बस्ती: वार्ड-23 में प्रशासन की संवेदनहीनता चरम पर।
राहगीरों की जान जोखिम में, नगर पालिका बनी 'मौन': वार्ड-23 की सुध लेने वाला कोई नहीं। अंधेरे और गड्ढों के साये में बस्ती का वार्ड-23, कब जागेगा जिम्मेदार प्रशासन?
अजीत मिश्रा (खोजी)
नगर पालिका की घोर लापरवाही: ‘स्मार्ट सिटी’ की हकीकत, आवास विकास में टूटी नाली बनी ‘मौत का कुआं’
- बस्ती: आवास विकास में टूटी नाली बनी ‘मौत का जाल’, नगर पालिका की चुप्पी पर सवाल!
- नगर पालिका की लापरवाही: वार्ड-23 में राहगीरों के लिए ‘मौत का कुआं’ बना मुख्य मार्ग।
- क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है नगर पालिका? टूटी नाली से मचा हाहाकार।
बस्ती, 17 जुलाई 2026
बस्ती शहर का ‘आवास विकास’ इलाका, जिसे कागजों में पॉश और विकसित होने का तमगा हासिल है, आज जमीनी स्तर पर नगर पालिका परिषद की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार कर रहा है। यहाँ के वार्ड नंबर 23 में मुख्य मार्ग पर टूटी नाली का पत्थर पिछले कई महीनों से प्रशासन की संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रहा है। यह मात्र एक पत्थर नहीं, बल्कि एक ऐसा ‘मौत का कुआं’ बन चुका है जो किसी भी दिन किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे सकता है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
शहर के इस व्यस्ततम मार्ग से रोजाना सैकड़ों मासूम स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और दफ्तर जाने वाले लोगों का गुजरना होता है। सड़क के बीचो-बीच खुले इस गड्ढे ने राहगीरों का चलना दुश्वार कर दिया है। रात के अंधेरे और बरसात के दौरान यह गड्ढा साक्षात यमराज की तरह सामने खड़ा होता है। अब तक कई लोग इस नाली में गिरकर चोटिल हो चुके हैं, लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
शिकायतों का ढेर, लेकिन समाधान शून्य
स्थानीय निवासियों का आक्रोश जायज है। लोगों का कहना है कि उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से लेकर संबंधित अधिकारियों तक दर्जनों बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासनों की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या एक छोटे से नाली के पत्थर को ठीक करवाना नगर पालिका के बजट या कार्यक्षमता से बाहर की बात है?
‘पॉश’ इलाके की यह दुर्दशा, तो बस्तियों का क्या हाल?
अगर शहर के सबसे मुख्य और विकसित कहे जाने वाले इलाके की यह बदहाली है, तो नगर पालिका के दावों की पोल खुद-ब-खुद खुल जाती है। प्रशासन की यह चुप्पी दो बातों की ओर इशारा करती है: या तो नगर पालिका पूरी तरह अक्षम हो चुकी है, या फिर वे किसी गंभीर हादसे के बाद ही अपनी नींद से जागने की रस्म अदायगी करना चाहते हैं।
चेतावनी और मांग
स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब और अधिक इंतजार करना जनहानि को न्योता देना है। वार्ड 23 के बाशिंदों ने जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या जनहित का काम करने के लिए भी जनता को सड़क पर उतरना पड़ेगा? समय रहते यदि नाली का पत्थर दुरुस्त नहीं किया गया, तो आने वाले समय में होने वाली किसी भी दुर्घटना की संपूर्ण जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद बस्ती की होगी।
यह स्थिति स्थानीय प्रशासन के लिए एक आईना है। क्या नगर पालिका के अधिकारी अब भी मौन रहेंगे, या फिर किसी दुर्घटना के बाद ही उनकी नींद खुलेगी? बस्ती की जनता जवाब मांग रही है।


















